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नई दिल्ली : देश के कई शहरों में हाल के दिनों में जलभराव और भूस्खलन की घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शहरी बाढ़ का प्रबंधन, नालों की सफाई, गाद निकासी तथा जल निकासी एवं सीवरेज व्यवस्था का रखरखाव राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies-ULBs) और शहरी विकास प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार योजनागत हस्तक्षेप, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है।
शहरी बाढ़ के पीछे क्या हैं प्रमुख कारण
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs-MoHUA) के अनुसार अल्प अवधि में होने वाली अत्यधिक तीव्र वर्षा की घटनाएं शहरी बाढ़ का प्रमुख कारण बन रही हैं। इसके अलावा अनियोजित शहरी विकास, प्राकृतिक जल निकायों पर अतिक्रमण, अपर्याप्त सीवरेज नेटवर्क और कमजोर वर्षा जल निकासी व्यवस्था इस समस्या को और गंभीर बना देती है।
नालों की सफाई का खर्च केंद्र के पास दर्ज नहीं
केंद्र सरकार ने बताया कि मानसून से पहले नालों की सफाई, गाद निकासी और संबंधित कार्य शहरी स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन गतिविधियों पर राज्यों और नगर निकायों द्वारा किए गए व्यय का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
MoHUA ने जारी किए कई दिशा-निर्देश
शहरी जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय ने कई मार्गदर्शक दस्तावेज और मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) जारी की हैं। इनमें प्रमुख हैं—
शहरी एवं क्षेत्रीय विकास योजना (URDPFI) दिशा-निर्देश
शहरी बाढ़ के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)
नदी-केंद्रित शहरी नियोजन दिशा-निर्देश
वर्षा जल संचयन पार्कों के लिए मार्गदर्शिका
तूफानी जल निकासी प्रणाली पर मार्गदर्शक पुस्तिका
AMRUT योजना के तहत 838 तूफानी जल निकासी परियोजनाएं
वर्ष 2015 में शुरू की गई अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) के अंतर्गत तूफानी जल निकासी को प्रमुख घटक बनाया गया है।
योजना के तहत:
₹3,022.39 करोड़ लागत की 838 स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज परियोजनाएं शुरू की गईं।
₹1,604.13 करोड़ लागत की 2,522 हरित क्षेत्र एवं पार्क परियोजनाएं शुरू हुईं।
इनके माध्यम से लगभग 5,400 एकड़ पारगम्य हरित क्षेत्र विकसित किया गया।
AMRUT 2.0 में जल निकायों के कायाकल्प पर जोर
केंद्र सरकार के अनुसार AMRUT 2.0 के तहत:
₹6,003.34 करोड़ की लागत वाली 2,951 जल निकाय कायाकल्प परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
ये परियोजनाएं लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्र को कवर करती हैं।
₹1,087.12 करोड़ लागत की 1,649 हरित क्षेत्र एवं पार्क परियोजनाएं भी मंजूर की गई हैं, जिनका दायरा लगभग 12,750 एकड़ है।
सीवरेज नेटवर्क के विस्तार पर भी काम
AMRUT के तहत:
888 सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएं शुरू की गईं।
लगभग 22,539 किलोमीटर सीवर नेटवर्क विकसित किया गया।
वहीं AMRUT 2.0 के तहत:
605 परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
इनसे लगभग 40,021 किलोमीटर सीवर नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।



