UP Dairy Success Story: योगी सरकार की योजना से बदली प्रतापगढ़ के युवक की तकदीर, डेयरी से सालाना 20 लाख रुपये की आय

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और डेयरी उद्यमिता का प्रभावी माध्यम बनती नजर आ रही है। प्रतापगढ़ जिले के सांड़वा चंडिका गांव निवासी शिवम सिंह ने इस योजना का लाभ लेकर आधुनिक डेयरी स्थापित की और आज उनकी वार्षिक आय 20 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। एक घायल देसी गाय की सेवा से शुरू हुआ यह सफर अब 25 गोवंश, आधुनिक डेयरी और ग्रामीण रोजगार का उदाहरण बन गया है।

राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के तहत स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

घायल देसी गाय की सेवा से शुरू हुई सफलता की कहानी

शिवम सिंह के अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले उनके पिता राकेश सिंह को रास्ते में एक घायल देसी गाय मिली थी। परिवार ने उसे घर लाकर उपचार और देखभाल शुरू की। इसी दौरान गोपालन के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और धीरे-धीरे गोवंश की संख्या बढ़कर 25 तक पहुंच गई।

बाद में उन्हें मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने योजना के लिए आवेदन किया।

योजना के तहत मिला ऋण, आधुनिक डेयरी की हुई शुरुआत

शिवम सिंह का चयन योजना के लिए होने पर उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उन्होंने राजस्थान से साहीवाल और गिर नस्ल की 10 उच्च गुणवत्ता वाली गायें खरीदीं और आधुनिक डेयरी की स्थापना की।

वर्तमान में उनकी डेयरी से प्रतिदिन लगभग 110 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इसी के आधार पर उनकी वार्षिक आय 20 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है।

ए2 दूध और वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों की तैयारी

शिवम सिंह ने बताया कि उनकी डेयरी में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बेहतर नस्ल की बछियाओं का जन्म हो रहा है और स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।

अब उनका लक्ष्य ए2 दूध से घी और अन्य मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना है। साथ ही वे उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के ब्रीड डेवलपमेंट पर भी बड़े स्तर पर काम करने की योजना बना रहे हैं।

ग्रामीण युवाओं के लिए बन रहा प्रेरक मॉडल

राज्य सरकार का कहना है कि शिवम सिंह की सफलता दर्शाती है कि यदि आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बड़े अवसर विकसित किए जा सकते हैं। डेयरी व्यवसाय के माध्यम से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

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