सावन का पहला सोमवार, आस्था की हिलोरों से शिवमय हुआ प्रदेश

  • योगी सरकार की ओर से सुरक्षा, सुगम दर्शन और मूलभूत सुविधाओं का था पूरा इंतजाम
  • -हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजी काशी से लेकर मेरठ तक की धरती
  • -कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज मंडल में उमड़ा भक्तों का अपार जनसैलाब

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

लखनऊ : सावन के पहले सोमवार पर पूरा प्रदेश शिवमय हो उठा। भोर की पहली किरण फूटने से पहले ही शिवालयों के शिखर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठे। कहीं कतारें रात के अंधेरे में ही लगनी शुरू हो गईं, तो कहीं तड़के साढ़े तीन बजे भक्तों के कदम मंदिर की ओर बढ़ चले। यह करोड़ों हृदयों में उमड़ी आस्था की वह लहर थी जिसने काशी से मेरठ और प्रयागराज तक पूरे प्रदेश को एक ही भाव-सूत्र में पिरो दिया। इस अपार आस्था को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए योगी सरकार की ओर से सुरक्षा, सुगम दर्शन और मूलभूत सुविधाओं का पूरा इंतजाम था।

शिव के स्वागत में बिछी भक्ति की चादर
काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के स्वागत का दृश्य किसी उत्सव से कम न था। देर रात से पहुंचे श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर अगवानी हुई, मानो स्वयं भोलेनाथ धरती पर उतर आए हों। नाथ नगरी बरेली में बाबा को ‘श्री शंकर स्वरूप’ में सजाया गया। यह श्रृंगार भक्तों के लिए किसी दिव्य दर्शन से कम नहीं था। नगर में दो स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन हुआ, जहां जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने स्वयं पुष्पमालाएं पहनाकर भक्तों का उत्साह बढ़ाया और प्रसाद वितरण में हाथ बंटाया। कांवड़ यात्रियों के लिए विश्राम गृह से लेकर मेडिकल कैंप तक हर सुविधा पहले से तैयार रखी गई। यह योगी सरकार की उस सोच का प्रतिबिंब है, जिसमें आस्था और व्यवस्था को साथ लेकर चलने का संकल्प झलकता है।

सुरक्षा के हर घेरे को पार किया शिवभक्ति ने
सावन के पहले सोमवार पर मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और बुलंदशहर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों के बाहर सुबह से लगी लंबी कतारों में हर चेहरे पर वही एक भाव था, भोले की भक्ति में समर्पण। मेरठ के सिद्धपीठ औघड़नाथ मंदिर में साढ़े तीन बजे से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे थे। भीड़ के इस विशाल रूप को देखते हुए पुलिस ने त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ड्रोन कैमरों की चौकस निगरानी में रहा, डॉग स्क्वाड और क्विक रिस्पॉन्स टीम भी हर पल मुस्तैद दिखी। बागपत के ऐतिहासिक पुरा महादेव परशुरामेश्वर मंदिर में भगवान आशुतोष के जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। बुलंदशहर के शिकारपुर तहसील क्षेत्र स्थित प्राचीन बरासऊ शिव मंदिर में भी भक्तों की विशेष भीड़ देखी गई। पास ही स्थित श्री द्वादश महालिंगेश्वर मंदिर में भी भक्तों का तांता घंटों तक कतार में खड़ा रहा, हर कोई धैर्यपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा करता दिखा।

संगम की लहरों में घुली शिव भक्ति
प्रयागराज मंडल के इनपुट के अनुसार, संगम नगरी में सावन का पहला सोमवार आस्था और लोक परंपराओं के एक अनोखे संगम का साक्षी बना। सृष्टि सृजन के समय सबसे पहले गंगा तट पर स्थापित माने जाने वाले दशाश्वमेध घाट के ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर के साथ-साथ मनकामेश्वर मंदिर, अरैल के सोमेश्वर महादेव और गोविन्दपुर के गंगेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही शिवभक्तों की कतारें लगी रहीं, जैसे संगम की लहरें स्वयं शिव भक्ति का संदेश लेकर घाट-घाट पहुंच रही हों। कालिंदी के तट पर आयोजित प्रयाग की परंपरागत अश्व दौड़ ने भी भक्तों को खूब रोमांचित किया।

भक्ति और व्यवस्था का संगम
काशी से बरेली, मेरठ मंडल से प्रयागराज मंडल तक, सावन के इस पहले सोमवार ने पूरे प्रदेश को एक ही आस्था की डोर में बांध दिया। हर घाट, हर मंदिर, हर गली में एक ही स्वर गूंजता रहा- हर-हर महादेव, बम-बम भोले। इस असीम श्रद्धा को सहेजने के लिए योगी सरकार ने सुरक्षा और सुविधा के हर पहलू पर पहले से तैयारी की। ड्रोन निगरानी, बहुस्तरीय पुलिस बल, चिकित्सा शिविर, विश्राम गृह और विशेष यातायात प्रबंधन रहा, ताकि आस्था की यह यात्रा किसी भी भक्त के लिए बाधा न बने। यह सावन का पहला सोमवार केवल एक तिथि नहीं, बल्कि प्रदेश की सामूहिक चेतना में उमड़ी उस भक्ति-लहर का प्रमाण बनकर सामने आया, जो हर वर्ष और गहरी होती जा रही है।

Related Articles

Back to top button