UP Maternal Health: उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में तीन महीने तक सभी प्रसव अस्पतालों में, घर पर एक भी डिलीवरी दर्ज नहीं

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि का दावा किया है। सरकार के अनुसार, प्रदेश के 16 जिलों में पिछले तीन महीनों (अप्रैल से जून) के दौरान सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए और इस अवधि में एक भी गैर-संस्थागत (घर या अन्य स्थान पर) प्रसव दर्ज नहीं किया गया।

सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच, गर्भवती महिलाओं में जागरूकता तथा आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

सुरक्षित मातृत्व के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को किया गया मजबूत

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

इसी उद्देश्य से—

जिला महिला अस्पतालों,
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC),
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC)

में प्रसूति सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही आवश्यक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव की दर में निरंतर वृद्धि से मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में और कमी लाने में मदद मिलेगी।

इन 16 जिलों में नहीं हुआ एक भी गैर-संस्थागत प्रसव

HMIS (Health Management Information System) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच निम्नलिखित जिलों में एक भी प्रसव घर या अन्य गैर-स्वास्थ्य संस्थान में दर्ज नहीं हुआ—

गोरखपुर
देवरिया
आजमगढ़
वाराणसी
अमेठी
अयोध्या
सुलतानपुर
प्रतापगढ़
प्रयागराज
गाजीपुर
शामली
गाजियाबाद
हाथरस
इटावा
महोबा
कौशांबी
समय पर पंजीकरण और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका रही अहम स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. शालू गुप्ता के अनुसार, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए गए हैं।

इनमें प्रमुख रूप से—

गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण,
नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC),
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान,
आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क,
108 एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता,
जननी सुरक्षा योजना और मातृत्व लाभ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल हैं।

संस्थागत प्रसव से मां और नवजात दोनों की सुरक्षा

वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रावती के अनुसार, मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।

उन्होंने बताया कि अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की उपलब्धता, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, नवजात की तत्काल देखभाल, रक्त की व्यवस्था तथा आवश्यकता पड़ने पर रेफरल सुविधा उपलब्ध होने से जटिल परिस्थितियों में भी मां और शिशु की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जागरूकता अभियान का भी दिखा असर

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस उपलब्धि में आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से नियमित संपर्क बनाए रखा, प्रसव की संभावित तिथि से पहले आवश्यक तैयारियां कराईं और समय पर अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया।

Related Articles

Back to top button