रक्षा-राजनीति नेटवर्क
टोरंटो : कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस का बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा जांच में भारतीय सरकार या उसके अधिकारियों की संलिप्तता साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है. RCMP की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने बताया कि जांच अभी जारी है और 50 से अधिक सर्च वारंट पर कार्रवाई की जा चुकी है. यह बयान ऐसे समय आया है जब पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर शक जताया था और भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे. इस घटनाक्रम को भारत-कनाडा संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
भारतीय सरकार या अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला.
नई दिल्ली: कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने साफ कहा है कि मौजूदा जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे भारत सरकार या उसके किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित होती हो. यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2023 में संसद में भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तनाव आ गया था. लेकिन अब कनाडा की जांच एजेंसी का यह रुख उस पूरे नैरेटिव पर सवाल खड़े कर रहा है. इसी बीच अमेरिका में दाखिल एक नए संघीय आरोपपत्र ने मामले को नया आयाम दे दिया है. इसमें भारत सरकार नहीं बल्कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क का नाम सामने आया है.
अमेरिका के संघीय आरोपपत्र के अनुसार 2023 में कनाडा में हुई एक सिख व्यक्ति की हत्या के पीछे लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ द्वारा निर्देश दिए जाने का दावा किया गया है. आरोपपत्र में पीड़ित का नाम सीधे नहीं लिखा गया, लेकिन उसे केवल HSN के शुरुआती अक्षरों से पहचान दी गई है, जो हरदीप सिंह निज्जर से मेल खाता है. अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि बिश्नोई गिरोह ने इस हत्या समेत कई हाई-प्रोफाइल वारदातों का इस्तेमाल सिख और भारतीय समुदाय में डर का माहौल बनाने तथा अपने कथित उगाही और आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया. ऐसे में अब एक तरफ कनाडा भारत सरकार के खिलाफ सबूत न मिलने की बात कह रहा है, जबकि दूसरी ओर अमेरिकी जांच का फोकस संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर केंद्रित दिखाई दे रहा है.
RCMP के बयान ने बदल दी बहस की दिशा
कनाडाई पुलिस के इस बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से भारतीय एजेंटों पर संदेह जताया था. उस बयान के बाद भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया था. अब पुलिस का कहना है कि मौजूदा जांच में भारतीय सरकार या उसके अधिकारियों की भूमिका साबित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला है. इससे पूरे मामले की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है.
RCMP ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. अधिकारियों का कहना है कि कई डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है और अलग-अलग एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है. इसलिए अंतिम निष्कर्ष आने तक जांच जारी रहेगी. पुलिस का कहना है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
निज्जर की हत्या जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारे की पार्किंग में हुई थी. दो नकाबपोश हमलावरों ने उसकी कार के पास गोली मारकर हत्या कर दी थी. यह घटना कनाडा की कानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बन गई थी.
निज्जर मूल रूप से पंजाब के जालंधर जिले का रहने वाला था. वह 1997 में कनाडा चला गया था और वहीं बस गया. उसने प्लंबर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के कारण चर्चा में आया. भारत सरकार ने उसे पहले ही आतंकवादी घोषित कर रखा था और उस पर प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख साजिशकर्ता होने सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे.
भारत लगातार आरोपों को करता रहा खारिज
भारत सरकार ने शुरुआत से ही कनाडा के आरोपों को निराधार बताया था. सरकार का कहना था कि बिना ठोस सबूत किसी भी देश पर आरोप लगाना उचित नहीं है. भारत ने कनाडा से कई बार आतंकवादी और अलगाववादी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी. भारत का आरोप रहा है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थक खुलकर सक्रिय हैं और उनपर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है.
50 से ज्यादा सर्च वारंट, जांच अब भी जारी
RCMP के अनुसार जांच एजेंसियों ने अब तक 50 से अधिक सर्च वारंट दिए हैं. बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक विश्लेषण जारी है.
भारत-कनाडा संबंधों पर क्या होगा असर?
एक्सपर्ट का मानना है कि RCMP का यह बयान दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में अहम साबित हो सकता है. हालांकि जांच अभी जारी है, इसलिए कूटनीतिक स्तर पर पूरी तरह सामान्य स्थिति बनने में समय लग सकता है. लेकिन फिलहाल कनाडाई पुलिस द्वारा भारतीय सरकार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने की बात स्वीकार करना इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.



