आज के युद्धक्षेत्र में जीवित रहना सबसे योग्य होने के बारे में नहीं है, बल्कि उनके बारे में है जो उभरते अवसरों का लाभ उठाते हैं : अनिल चौहान

Survival in today's battlefield is not about being the fittest, but about those who take advantage of emerging opportunities: Anil Chauhan

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

“आज के युद्धक्षेत्र में जीवित रहना सबसे योग्य होने के बारे में नहीं है, बल्कि उनके बारे में है जो अनुकूलन करते हैं, परिवर्तन करते हैं, खुद को स्थिति में लाते हैं और उभरते अवसरों का लाभ उठाते हैं।” चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (सीडीएम), सिकंदराबाद में यह बात कही। उन्‍होंने 21वीं सदी के जटिल सुरक्षा परिदृश्य को नेविगेट करने की चुनौतियों पर उच्च रक्षा प्रबंधन पाठ्यक्रम एचडीएमसी-20 का अध्‍ययन कर रहे भावी रणनीतिक नेताओं को संबोधित किया।

इस अवसर पर जनरल अनिल चौहान ने समकालीन और उभरती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्‍होंने कहा कि इसके लिए तेजी से बदलती वैश्विक शक्ति गतिशीलता, गैर-पारंपरिक खतरों और तेज गति वाले एआई व्यवधानों की विशेषता वाली तकनीकी प्रगति के बीच अनुकूलनशीलता, लचीलापन और दूरदर्शी नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण है। सीडीएस ने समन्वित प्रतिक्रिया के लिए संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को आकार देने में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका को रेखांकित किया।

रक्षा सुधारों के वर्ष में राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तुकला और परिवर्तन प्रबंधन पर भाषण में सीडीएस ने सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) के कामकाज और सशस्त्र बलों में संयुक्तता, एकीकरण और तालमेल को बढ़ावा देने की दिशा में परिवर्तनकारी अभियान के बारे में गहन जानकारी दी। उन्होंने सशस्त्र बलों के लिए विजन 2047, संयुक्त सिद्धांतों, रक्षा और सैन्य नीतियों के साथ-साथ एकीकृत क्षमता विकास योजना को अंतिम रूप देने के प्रयासों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्‍होंने डीएमए द्वारा शुरू की गई आत्मनिर्भरता पहलों पर विस्तार से चर्चा करते हुए परिवर्तन के वर्ष के रोडमैप का सूक्ष्म परिप्रेक्ष्य प्रदान किया।

जनरल चौहान ने मित्र देशों के अधिकारियों सहित संकाय सदस्यों और पाठ्यक्रम प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की। उन्‍होंने उभरते रणनीतिक माहौल में आगे रहने के लिए रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर नवाचार, प्रयोग और सहयोग को बढ़ावा देने के महत्व पर अंतर्दृष्टि प्रस्‍तुत की। सीडीएस का सीडीएम का दौरा रक्षा प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका का प्रमाण है।

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