
रक्षा-राजनीति नेटवर्क
पिछले दस वर्षों में, भारतीय नौसेना ने भारत सरकार के क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास ( सागर ) के विजन के अनुरूप समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) की समुद्री एजेंसियों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत किया है। भारतीय नौसेना संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समन्वित गश्त, सूचना साझाकरण, एचएडीआर प्रयास, क्षमता निर्माण और अन्य राजनयिक जुड़ाव जैसी कई पहलों पर आईओआर देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग कर रही है। सागर अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और मार्च 2025 में मॉरीशस की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति (महासागर) की घोषणा के साथ , भारतीय नौसेना आईओएस सागर और एआईकेवाईएमई की अपनी पहली पहल शुरू कर रही है। इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के कद को हिंद महासागर क्षेत्र में ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ और ‘प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता’ के रूप में मजबूत करना है।
आईओएस सागर
हिंद महासागर शिप (आईओएस) सागर, आईओआर देशों के साथ निरंतर सहयोग की दिशा में एक पहल है। एक भारतीय नौसेना जहाज ( आईएनएस सुनयना ) को भारत और नौ मित्र देशों (कोमोरोस, केन्या, मेडागास्कर, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका) के संयुक्त चालक दल के साथ दक्षिण-पश्चिम आईओआर में तैनात किया जा रहा है। जहाज को अप्रैल 2025 में एक महीने से अधिक समय के लिए तैनात करने की योजना है, और यह दार-एस-सलाम, नकाला, पोर्ट लुइस, पोर्ट विक्टोरिया और माले में बंदरगाहों पर जाएगा और तंजानिया, मोजाम्बिक, मॉरीशस और सेशेल्स के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (ईईजेड) की संयुक्त निगरानी करेगा।
एफएफसी के कार्मिक कोच्चि में विभिन्न नौसेना व्यावसायिक स्कूलों में दो सप्ताह का प्रशिक्षण लेंगे, जिसमें समुद्र में प्रशिक्षण भी शामिल है। एफएफसी कार्मिक होलशिप गतिविधियों, निगरानी और अपनी संबंधित शाखाओं/व्यापार से संबंधित अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे। आईओएस सागर के प्रतिभागियों को तंजानिया के दार-एस-सलाम में अभ्यास एआईकेईवाईएमई के बंदरगाह चरण की गतिविधियों को देखने की भी योजना है।
एआईकेईवाईएमई
भारत और अफ्रीका समुद्री सुरक्षा को अत्यधिक महत्व देते हैं और उन्होंने समुद्री सुरक्षा के लिए खतरों जैसे समुद्री डकैती, तस्करी सहित अवैध गतिविधियों, अनियमित और अप्रतिबंधित तौर पर मछली पकड़ने से निपटने में सूचना और निगरानी साझा करने को लेकर सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। अफ्रीकी देशों के साथ बड़े पैमाने पर बहुपक्षीय समुद्री जुड़ाव अभ्यास, जिसे ‘अफ्रीका इंडिया की मैरीटाइम एंगेजमेंट’ नाम दिया गया है, जिसे ‘एआईकेईवाईएमई’ के रूप में भी जाना जाता है, जिसका संस्कृत में अर्थ ‘एकता’ है, नौसेनाओं /समुद्री एजेंसियों के साथ आपसी-संचालन को बढ़ाने के लिए इस दिशा में एक पहल है। पहले अभ्यास की मेजबानी भारतीय नौसेना और तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स (टीपीडीएफ) द्वारा की जा रही है और इसे तंजानिया के दार-एस-सलाम में आयोजित किया जाएगा, और इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा अप्रैल 2025 के मध्य में करने की योजना है। यह अभ्यास छह दिनों तक चलेगा और इसमें सह-मेजबानों के अलावा कोमोरोस, जिबूती, इरीट्रिया, केन्या, मेडागास्कर, मॉरीशस, मोजाम्बिक, सेशेल्स और दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी होगी। अभ्यास के हार्बर चरण में समुद्री डकैती और सूचना साझा करने पर टेबलटॉप और कमांड पोस्ट अभ्यास शामिल होंगे, साथ ही सीमैनशिप और विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर (वीबीएसएस) पर प्रशिक्षण भी होगा। समुद्री चरण में सीमैनशिप इवोल्यूशन, सर्च एंड रेस्क्यू, वीबीएसएस, छोटे हथियारों की फायरिंग और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन शामिल हैं।