पिछले तीन वर्षों के दौरान वन्य जीव में अवैध व्यापार के मामलों की संख्या में नहीं हुई है कोई वृद्धि

There has been no increase in the number of cases of illegal wildlife trade during the last three years

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

नई दिल्ली : वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के पास उपलब्ध रिकॉर्ड और राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा रिपोर्ट और उपलब्ध कराए गए मामलों के आधार पर, पिछले तीन वर्षों के दौरान वन्य जीव में अवैध व्यापार के मामलों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

अवैध वन्य जीव व्यापार पर नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं:

  • वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में वन्य जीवन के बेहतर संरक्षण के लिए समय-समय पर संशोधन किया गया है।
  • वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना वन्य जीव और उनसे जुड़े उत्पादों के अवैध व्यापार पर नियंत्रण के लिए की गई है।
  • वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो इंटरपोल के साथ समन्वय करते हुए वैश्विक संचालन में भाग लेता है।
  • वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो वन्य जीव अपराध से निपटने के लिए राज्य पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों सहित प्रवर्तन एजेंसियों के लिए संवेदनशीलता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता है।
  • भारत वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) का एक हस्ताक्षरकर्ता है, जो वन्य जीवन और उसके व्युत्पन्नों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है।
  • सीआईटीईएस के प्रावधानों को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में शामिल किया गया है।
  • वन्यजीव और उनके आवास के बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए, वन्यजीव आवास के एकीकृत विकास की केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
  • viii. बाघों और उनके आवास के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना की गई है।

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