आत्मनिर्भर भारत: रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ 642 करोड़ रुपये का अनुबंध किया

Self-reliant India: Defense Ministry signs contract worth Rs 642 crore with Bharat Electronics Limited

रक्षा-राजनीति नेटवर्क

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के इस्तेमाल हेतु 11 नई पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों और तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों के लिए 28 ईओएन-51 प्रणालियों की खरीद के उद्देश्य से नई दिल्ली में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसकी कुल लागत 642.17 करोड़ रुपये है, जिसमें खरीद (भारतीय-आईडीडीएम) श्रेणी के तहत कर भी शामिल हैं।

ईओएन-51 एक इलेक्ट्रो ऑप्टिकल फायर कंट्रोल प्रणाली है, जो इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और थर्मल इमेजर्स उपकरणों का उपयोग करके लक्ष्यों की खोज, पता लगाने व उनके वर्गीकरण की सुविधा प्रदान करती है। यह योजना तीन वर्षों की अवधि में अनेक रोजगार के अवसर सृजित करेगी। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सहित विभिन्न भारतीय उद्योगों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और इस पहल से रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ का लक्ष्य हासिल करने के सरकार के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होगी।

विमान निर्माण तकनीक और रक्षा नवाचार के भविष्य पर एक नज़र

एयरो इंडिया एशिया का सबसे बड़ा एयर शो है। यह द्विवार्षिक एयर शो और विमानन प्रदर्शनी है जिसे रक्षा प्रदर्शनी संगठन, रक्षा उत्पादन विभाग और रक्षा मंत्रालय बेंगलुरु में आयोजित करता है। एयरो इंडिया भारत की प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनी है जहां वैश्विक एयरो विक्रेता और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) एक के बाद एक हवाई कलाबाज़ी के प्रदर्शन से दर्शकों को रोमांचित करते हैं। यह एक प्रमुख कार्यक्रम है जो वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गजों, सरकारी अधिकारियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और रक्षा रणनीतिकारों को एक मंच पर लाता है। यह कार्यक्रम न केवल देश की तकनीकी शक्ति और नवाचारों को प्रदर्शित करता है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक संवाद के लिए एक गतिशील मंच भी प्रदान करता है।

एयरो इंडिया की विरासत और महत्व

एयरो इंडिया एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में विकसित हुआ है जो न केवल विमान निर्माण या अंतरिक्ष (एयरोस्पेस) प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति को उजागर करता है बल्कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों के बीच रणनीतिक बातचीत का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। यह शो देश की विमान निर्माण तकनीकी और रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। पिछले कुछ वर्षों में, एयरो इंडिया निम्नलिखित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है:

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन : इस कार्यक्रम में नियमित रूप से अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रणालियों, नवीन रक्षा समाधानों और सफल प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाता है, जो हवाई और अंतरिक्ष यात्रा के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

रणनीतिक संवाद को बढ़ावा देना : उच्च स्तरीय बातचीत के जरिए एयरो इंडिया ने नीति, रक्षा सहयोग और एयरोस्पेस क्षेत्र के भविष्य की कार्य योजना पर चर्चा के लिए मंच प्रदान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी बढ़ाना : वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों और रक्षा एजेंसियों की भागीदारी के साथ, यह शो अंतर्राष्ट्रीय एयरोस्पेस समुदाय में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भारत की बढ़ती स्थिति को दर्शाता है।

इस विरासत ने न केवल इस आयोजन के वर्तमान संस्करणों का मार्ग प्रशस्त किया है, बल्कि भविष्य के लिए एक उच्च मानक भी स्थापित किया है। एयरो इंडिया एक प्रदर्शनी से कहीं अधिक है – यह नवाचार, रणनीति और राष्ट्रीय गौरव का केंद्र बिंदु है।

एयरो इंडिया 2025

एयरो इंडिया 2025, एयरो इंडिया का 15वां संस्करण है। इसे ऐतिहासिक संस्करण के रूप में डिज़ाइन किया गया है जिसे विमान निर्माण तकनीक या अंतरिक्ष (एयरोस्पेस) और रक्षा प्रौद्योगिकी में नए क्षेत्रों को दर्शाते हुए अपने पूर्ववर्तियों की सफलताओं का लाभ मिलता है। एयरो इंडिया 2025 का आयोजन 10 से 14 फरवरी 2025 तक कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के येलहंका एयर फ़ोर्स स्टेशन में किया जाएगा। शो के पहले तीन दिन व्यावसायिक आगंतुकों के लिए समर्पित हैं, जबकि अंतिम दो दिन आम जनता के लिए खुले हैं।

इसका व्यापक विषय है ‘एक अरब अवसरों का मार्ग’ ।

एयरो इंडिया 2025 के कार्यक्रम

इस पांच दिवसीय एयरशो में एक पूर्वावलोकन कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन, सीईओ गोलमेज सम्मेलन, आईडेक्स स्टार्ट-अप कार्यक्रम, शानदार एयर शो और भारतीय मंडप सहित एक विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र तथा विमान निर्माण कंपनियों का एक व्यापार मेला शामिल है।

सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बातचीत को संभव बनाने के लिए भारत ‘ब्रिज – अंतर्राष्ट्रीय रक्षा और वैश्विक जुड़ाव से आत्म-निर्भर बनाना’ विषय पर रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। यह गतिशील भू-राजनीतिक स्थितियों और आपसी समृद्धि के मार्ग को समाहित करता है, जिसे सुरक्षा और विकास की साझा समझ वाले देशों के बीच सहयोग के माध्यम से जोड़ा जा सकता है।

इस एयरशो के दौरान रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सचिव स्तर पर कई द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस दौरान सहयोगी देशों के साथ रक्षा और एयरोस्पेस संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने के लिए नए रास्ते तलाशे जा सकें।

सीईओ राउंड-टेबल से विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भारत में विनिर्माण के लिए अनुकूल मंच मिलने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम में वैश्विक सीईओ, घरेलू सार्वजनिक उपक्रमों के सीएमडी और भारत की प्रमुख निजी रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण कंपनियों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भाग लेंगे।

इंडिया पैवेलियन स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं और वैश्विक मंच के लिए तैयार अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन करके मेक-इन-इंडिया पहल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करेगा। भारतीय स्टार्ट-अप को बढ़ावा देना एयरो इंडिया 2025 का फोकस क्षेत्र है और उनके द्वारा विकसित अत्याधुनिक तकनीकों/उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला को एक विशेष आईडीईएक्स पैवेलियन में प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा, गतिशील एरोबैटिक प्रदर्शन और लाइव प्रौद्योगिकी प्रदर्शन आधुनिक एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म और प्रौद्योगिकियों की क्षमता को प्रदर्शित करते हुए एक गहन अनुभव प्रदान करेंगे। इस एयरशो में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर कई सेमिनारों की भी योजना बनाई गई है।

एयरो इंडिया 2023: एक पूर्वव्यापी विश्लेषण

एयरो इंडिया के पिछले संस्करणों ने भारत के एयरोस्पेस और रक्षा परिदृश्य के निरंतर विकास के लिए आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एयरो इंडिया 2023 का 14वां संस्करण 13 से 17 फरवरी तक कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित किया गया था जो 1996 में अपनी शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे बड़ा संस्करण रहा है। इसमें 100 से अधिक देशों और 809 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इसमें 53 विमानों के साथ पहली बार फ्लाई पास्ट हुआ। दुनिया भर से आए लोगों के लिए हमारी वायुशक्ति का प्रदर्शन किया गया। पांच दिनों के इस एयरशो में 7 लाख से अधिक लोग आए। एयरो इंडिया 2023 की विशेषता कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और प्रभावशाली प्रदर्शनों की श्रृंखला थी। एयरो इंडिया 2023 संस्करण के मुख्य पहलू थे:

उन्नत विमान निर्माण प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन : 2023 के एयरो इंडिया आयोजन ने कंपनियों को अत्याधुनिक एयरोस्पेस सिस्टम और रक्षा समाधान प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इसने न केवल तकनीकी नवाचार का प्रदर्शन किया बल्कि इस क्षेत्र में भविष्य की प्रगति के लिए मंच भी तैयार किया।

रणनीतिक सहभागिता को सुगम बनाना : एयरो इंडिया 2023 सरकारी अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों सहित हितधारकों के विविध समूह को एक साथ लाने में सहायक रहा। इस कार्यक्रम ने रणनीतिक संवाद के माहौल को बढ़ावा दिया जो सहयोगी उपक्रमों और तकनीकी साझेदारी पर केंद्रित था।

भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करना : एयरो इंडिया 2023 ने एक व्यापक और सुव्यवस्थित प्रदर्शनी की सफलतापूर्वक मेजबानी करके अपनी विमान निर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया। इस शो ने एयरोस्पेस नवाचार की अगली लहर को आगे बढ़ाने में वैश्विक भागीदारों के साथ जुड़ने के लिए देश की तत्परता को भी दिखाया।

एयरो इंडिया 2023 की सफलताओं और चुनौतियों ने मूल्यवान सबक प्रदान किए हैं जिन्हें एयरो इंडिया 2025 की योजना और क्रियान्वयन में शामिल किया जा रहा है। परिचालन उत्कृष्टता, अंतर्राष्ट्रीय सहकार्यता और तकनीकी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना ऐसे तत्व रहे हैं जो 2023 में प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे। अब ये तत्व आगामी संस्करण में आधारशिला के रूप में शामिल हैं। पिछले संस्करण में उत्पन्न आगे की गति 2025 में और भी बड़ी उपलब्धियों में तब्दील होने की उम्मीद है, जिसमें बेहतर प्रोटोकॉल, परिष्कृत रणनीतियां और विस्तारित वैश्विक भागीदारी शामिल है।

एयरो इंडिया 2023 में कार्यक्रम

इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक, मंथन स्टार्ट-अप कार्यक्रम, बंधन समारोह, शानदार एयर शो, बड़ी प्रदर्शनी, भारतीय मंडप और विमान निर्माण कंपनियों का व्यापार मेला शामिल हैं।

प्रमुख प्रदर्शक एवं उपकरण

एयरशो में प्रमुख प्रदर्शकों में एयरबस, बोइंग, डसॉल्ट एविएशन, लॉकहीड मार्टिन, इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, आर्मी एविएशन, एचसी रोबोटिक्स, एसएएबी, सफ्रान, रोल्स रॉयस, लार्सन एंड टूब्रो, भारत फोर्ज लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और बीईएमएल लिमिटेड शामिल थे।

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